डब्ल्यूएचओ ने ‘सीमित’ प्रकोप में हंटावायरस के अधिक मामलों की चेतावनी दी

नई दिल्ली, भारत । विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हाल ही में हंटावायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। संगठन ने कहा है कि वर्तमान में यह प्रकोप सीमित रूप में है, लेकिन ध्यान न दिया गया तो इसके फैलने की संभावना बनी हुई है।

हंटावायरस एक प्रकार का वायरस है जो खासतौर पर चूहों और संबंधित जीवों से मनुष्यों में फैलता है। यह वायरस आमतौर पर संक्रमित चूहों के मूत्र, थूक या फेके हुए मल के संपर्क में आने से शरीर में प्रवेश करता है। संक्रमण के लक्षणों में अचानक तेज बुखार, सिर दर्द, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी, और सांस लेने में कठिनाई प्रमुख हैं। गंभीर मामलों में यह फुफ्फुसीय सिंड्रोम का कारण बन सकता है, जो जानलेवा साबित हो सकता है।

डब्ल्यूएचओ ने स्थानीय स्वास्थ्य विभागों को संक्रमण की निगरानी बढ़ाने और आम जनता को सतर्क रहने का आदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि सीमित प्रकोप के पीछे मुख्य कारण साफ-सफाई के अभाव, चूहों का बढ़ना और संक्रमित क्षेत्रों में उचित रोकथाम न होना है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हंटावायरस से बचाव के लिए सबसे जरूरी उपाय है साफ-सफाई बनाए रखना और चूहों के संपर्क से बचना। घरों और आस-पास के इलाकों में कूड़ा-करकट न जमा होने दें और जहां जरूरत हो वहां कीट नियंत्रण का विशेष ध्यान रखें। साथ ही, संक्रमित इलाकों में विशेष सतर्कता बरतने और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की सलाह दी गई है।

डब्ल्यूएचओ की इस चेतावनी के मद्देनजर सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां संक्रमण को रोकने के लिए व्यापक योजना बना रही हैं। जनता को भी यह समझना होगा कि संक्रमण फैलने से रोकने में उनकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। समय पर इलाज और सावधानी के माध्यम से इस बीमारी के प्रभाव को कम किया जा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हंटावायरस संक्रमण का खात्मा नहीं हुआ है। इसलिए यह आवश्यक है कि वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय इस पर सतत ध्यान दे और सहयोग बढ़ाए। डब्ल्यूएचओ ने सभी देशों से अपील की है कि वे निगरानी बढ़ाएं और संक्रमण की जानकारी साझा करें ताकि शीघ्र रोकथाम हो सके।

अगले कुछ सप्ताह में स्वास्थ्य अधिकारियों की निगरानी और परीक्षणों को बढ़ाने की योजना है, ताकि किसी भी नए मामले का तुरंत पता चल सके और उचित कदम उठाए जा सकें। इस तरह के स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए सामूहिक प्रयास और जागरूकता सबसे बड़ी ताकत साबित होती है।

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