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The G7 Summit Is Dogged by Chaos and Divided by TrumpG7 सम्मेलन में उठे विवाद और ट्रम्प के विभाजनकारी कदम

Tokyo, Japan

विश्व की सात प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं, जिन्हें G7 समूह के रूप में जाना जाता है, इस साल अपने वार्षिक सम्मेलन के दौरान कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही हैं। इस बैठक का आयोजन सोमवार से शुरू हुआ, लेकिन यह अब एकजुट वैश्विक कूटनीतिक उद्देश्य के बजाय विभाजन और अस्थिरता का प्रतीक बनती जा रही है।

G7 समूह की बैठकें पहले सामूहिक वैश्विक व्यवस्था को बनाए रखने के प्रयास का हिस्सा थीं। लेकिन इस साल की बैठक में सदस्य देशों के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से दिख रहे हैं, जो इसके विघटन को दर्शाता है। विशेष रूप से अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के विभाजनकारी रुख और नीतियों ने इस समूह के बीच एकता को कमजोर किया है।

इस वर्ष के सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण मुद्दे चर्चा के लिए रखे गए हैं, जिनमें आर्थिक संकट, जलवायु परिवर्तन, और वैश्विक सुरक्षा शामिल हैं। हालांकि, इन विषयों पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाना कठिन साबित हो रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि G7 अब पहले जैसी सामूहिक कूटनीतिक शक्ति नहीं रही है और इसके भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं।

गौरतलब है कि इस समूह की स्थापना वैश्विक आर्थिक स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। लेकिन आज, राजनीतिक विभाजन और विभिन्न राष्ट्रीय हितों ने इस गठबंधन को कमजोर कर दिया है। अब यह देखना होगा कि आगामी बैठकें इस महत्वपूर्ण समूह को पुनर्जीवित कर सकेंगी या इसके विघटन की प्रक्रिया और तेज होगी।

इस बीच, दुनिया भर के पर्यवेक्षक यह मान रहे हैं कि G7 का भविष्य असमंजस में है और वैश्विक नेतृत्व के लिए नए रूपों और साझेदारियों की आवश्यकता है। इससे स्पष्ट होता है कि पारंपरिक समूहों की जगह अब ऐसी व्यापक और समावेशी कूटनीतिक व्यवस्थाएं ले रही हैं, जो वर्तमान वैश्विक चुनौतियों से निपट सकें।

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