सुप्रीम कोर्ट बोले, सिरी में हटाए गए वोटों से कम जीत अंतर वाले मामलो पर सुनेंगे तृणमूल के आवेदन

कोलकाता, पश्चिम बंगाल: पश्चिम बंगाल में हाल ही संपन्न विधानसभा चुनाव के बाद सिरी (संपर्क पुर्नस्थापन प्रणाली) के तहत हटाए गए वोटों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में पहली बार सुनवाई हुई है। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने इस मामले में दावा किया है कि भाजपा के 31 सीटों पर जीत का अंतर हटाए गए वोटों से भी कम है, इसलिए इस संबंध में उनकी याचिका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि वह इस महत्वपूर्ण विषय पर विचार करे क्योंकि चुनावी प्रक्रिया और मतगणना में किसी भी तरह की अनियमितता लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग और संबंधित प्राधिकारी इस मामले में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करें और वॉटरों की वैधता और निकासी की जांच होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने भी मामले की गंभीरता को समझते हुए कहा कि ऐसे विवादों में न्यायालय की भूमिका लोकतंत्र को मजबूत करना है। कोर्ट ने कहा कि यदि विजय अंतर हटाए गए मतों से कम है, तो इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और मामले की गहराई से जांच आवश्यक है।
तृणमूल के वकीलों ने प्रस्तुत किया कि सिरी की प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक खामियां हो सकती हैं, जिसके कारण वोटों की गिनती और समायोजन में त्रुटियां रह सकती हैं, जो चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए इन सीटों पर चुनाव परिणाम की वैधता पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
वहीं, भाजपा ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि चुनाव आयोग द्वारा लागू की गई सभी प्रक्रियाएं संविधान और कानून के अनुरूप हैं। उनकी ओर से यह भी कहा गया कि वोटों के हटाए जाने से संबंधित कोई गलतफहमी अदालत के सामने स्पष्ट होगी।
यह मामला पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजों की वैधता और चुनावी संगठनों के दावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण पूर्वपीठ स्थापना की तरह माना जा रहा है। कोर्ट की आगामी सुनवाई में इस मुद्दे पर और विस्तृत चर्चा की संभावना है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला आने वाले समय में चुनावी नियमों और मतदान तकनीकों के सुधार का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। चुनाव आयोग भी इस मुद्दे पर अपनी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत कर सकता है ताकि मामले का निष्पक्ष निपटारा हो सके।
सूत्रों के अनुसार, अदालत इस सुनवाई में निष्पक्षता बनाए रखने और सभी पक्षों को पर्याप्त सुनवाई का मौका देने पर जोर दे रही है ताकि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों पर उठे संदेहों का उचित समाधान निकल सके।



