स्विमिंग पूल और दृष्टि स्वास्थ्य: इस गर्मी अपनी नजर को कैसे सुरक्षित रखें

नई दिल्ली, भारत – गर्मी के मौसम में तैराकी एक लोकप्रिय खेल और व्यायाम बन जाता है। हालांकि, स्विमिंग पूल में पानी की सफाई के लिए इस्तेमाल होने वाले क्लोरीन के कारण आंखों में जलन हो जाने की बात आम सुनी जाती है। परंतु, विशेषज्ञों के अनुसार, असल में समस्या क्लोरीन की नहीं होती, बल्कि क्लोरीनामाइंस की होती है।
क्लोरीनामाइंस तब बनते हैं जब क्लोरीन स्विमिंग पूल में पसीना, पेशाब और अन्य जैविक पदार्थों के साथ प्रतिक्रिया करता है। ये यौगिक आँखों में ज्यादा जलन और असहजता का कारण बनते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझना जरूरी है कि क्लोरीन ही मुख्य दोषी नहीं है।
डॉ. अंजलि शर्मा, एक नेत्र रोग विशेषज्ञ, बताती हैं, “अतः स्वच्छ और अच्छी तरह से चल रहे पूल का चयन करना जरूरी है। पूल का नियमित रखरखाव, क्लोरीन और अन्य रसायनों का संतुलित स्तर, तैराकों की व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़ी सावधानियां, और पूल में जैविक पदार्थों का कम रहना आवश्यक है।”
तैराकों को सलाह दी जाती है कि वे स्विमिंग के दौरान गोर्कल्स (गोगल्स) पहनें। इससे आंखों को जलन से बचाने में मदद मिलती है। तैराकी के बाद भी आँखों को साफ पानी से धोना चाहिए ताकि क्लोरीनामाइंस के प्रभाव को कम किया जा सके।
स्वच्छता और सुरक्षा के अन्य उपायों में शामिल हैं – पूल में प्रवेश करने से पहले शॉवर लेना, पूल की गुणवत्ता पर निगरानी रखना, और जब भी संभव हो तो पूर्ण रूप से स्वच्छ टेरीटरीज़ युक्त नौकरियों का उपयोग करना।
स्वीमिंग पूल में तय मानकों का पालन करना और सावधानी बरतना हर तैराक के लिए जरूरी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनकी आंखें और स्वास्थ्य सुरक्षित रहें। जलन से बचाव के ये उपाय न केवल आरामदायक तैराकी अनुभव प्रदान करते हैं, बल्कि आंखों की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए इस गर्मी में, स्वच्छ पूल चुनें, गोगल्स लगाएं और तैराकी के बाद अपनी आंखों को अच्छी तरह से धोएं ताकि आपकी दृष्टि बनी रहे स्वस्थ और सुरक्षित।



