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भारतीय कर्मचारी करियर उन्नति की बजाय कम तनाव और लचीली नौकरियों को प्राथमिकता दे रहे हैं: Indeed रिपोर्ट

नई दिल्ली, भारत

भारतीय कर्मचारियों की नौकरी की प्राथमिकताएं बदल रही हैं। हालिया Indeed रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि अब भारतीय कर्मचारी करियर की तेजी से उन्नति के मुकाबले कम तनाव और लचीली कार्य व्यवस्थाओं को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। यह रुझान दर्शाता है कि कार्य-जीवन संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य अब नौकरी के चयन में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

Indeed के सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 68% भारतीय कर्मचारी तनावमुक्त और लचीली कार्य-शैली वाली नौकरियों को प्राथमिकता देते हैं, जबकि केवल 32% कर्मचारी तेजी से करियर ग्रोथ को सोचते हैं। इस आंकड़े से यह स्पष्ट होता है कि कर्मचारी अब पारंपरिक कैरियर उन्नति की दौड़ से हटकर अपने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को महत्व दे रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के बाद इस प्रवृत्ति में वृद्धि हुई है क्योंकि कर्मचारियों ने वर्क फ्रॉम होम और लचीले काम के घंटों के फायदों को महसूस किया है। अभूतपूर्व परिस्थितियों ने लोगों को नौकरी चयन के मानकों पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनियां जो कार्य-स्थल पर कम तनाव और पर्याप्त फ्लेक्सिबिलिटी प्रदान करती हैं, वे अधिक प्रतिभाशाली कर्मचारियों को आकर्षित और बनाए रखने में सक्षम होती हैं। इस कारण ऐसे नियोक्ता भविष्य में मानव संसाधन की प्रतिस्पर्धा में आगे रहेंगे।

हालांकि करियर ग्रोथ की महत्ता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, परंतु वह अब नौकरी के चयन के अंतिम कारकों में से एक बन गई है। इधर, युवा पेशेवर विशेष रूप से अपनी नौकरी के प्रति मानसिक संतुलन और व्यक्तिगत जीवन को बढ़ावा देने वाले पहलुओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।

विद्यार्थी पेशे से लेकर अनुभवी कर्मचारियों तक, सभी वर्गों में इस नवीन सोच का प्रभाव देखा जा रहा है। इससे यह भी अनुमान लगता है कि भारतीय कारोबारी माहौल में बदलाव के साथ-साथ कार्यक्षेत्र में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ रही है।

भविष्य में, यह संभव है कि कंपनियां और नीति निर्माता ऐसे ढांचे और नीतियां अपनाएं जो कर्मचारियों के तनाव को कम करें और काम के घंटे में लचीलापन प्रदान करें। इससे न केवल उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि कर्मचारी संतुष्टि और संगठन की स्थिरता भी सुनिश्चित होगी।

इस रिपोर्ट के प्रकाशन के साथ ही उम्मीद है कि भारतीय श्रम बाजार में नौकरी की प्राथमिकताओं में यह बदलाव नए और सकारात्मक रोजगार संवेदनशीलता के युग का सूत्रपात करेगा।

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