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रेयुडू का कहना है कि एमआई से नाता तोड़ने के बाद किशन का विकास हुआ

मुंबई, महाराष्ट्र। भारत के पूर्व बल्लेबाज और अनुभवी क्रिकेटर एम एस धोनी की कप्तानी में मुंबई इंडियंस (MI) के साथ जुड़े दिन अब पीछे छूट चुके हैं, परन्तु इससे इंतजार करना और खुद को साबित करना हर खिलाड़ी के लिए बड़ा चुनौतीपूर्ण होता है। इसी संदर्भ में, विजय हजारे ट्रॉफी जैसे घरेलू टूर्नामेंटों में चमकने वाले किशन के बारे में खिलाड़ियों और विशेषज्ञों के बीच चर्चा जारी है।

राजीव रॉयडू ने एक इंटरव्यू में कहा कि “अपने आसपास के सभी सितारों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करना बहुत, बहुत कठिन होता।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किशन का विकास MI के साथ न जुड़े रहने के बाद और अधिक हुआ है। रॉयडू ने बताया कि किशन ने खुद को बाहर साबित करने के लिए निरंतर मेहनत की है और टीम में अपनी जगह पाने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना किया है।

वास्तव में, मुंबई इंडियंस जैसी फ्रेंचाइजी में जहां रोहित शर्मा, सूर्यकुमार यादव और कई विश्व स्तरीय खिलाड़ी होते हैं, वहां नए खिलाड़ियों के लिए जगह बनाना आसान नहीं होता। रॉयडू के अनुसार, किशन ने इस दबाव को स्वीकार करते हुए अपनी बल्लेबाजी में सुधार किया है और अब वे अधिक जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं।

किशन के खेल में निरंतरता उनके प्रदर्शन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में मदद कर रही है। घरेलू मैचों में उनके योगदान ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के क्रिकेट प्रेमियों का ध्यान खींचा है और एक उम्मीद जगाई है कि वे भारतीय क्रिकेट टीम में मजबूती से अपनी जगह बना सकते हैं।

अंत में, रॉयडू ने सभी युवाओं को प्रेरित किया कि कठिनाइयों से हार न मानें और लगातार मेहनत करें। उन्होंने कहा कि किशन का उदाहरण दिखाता है कि सही सोच और समर्पण से कोई भी खिलाड़ी अपनी जगह बना सकता है, भले ही शुरुआती दौर में चुनौतियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों। यह वक्त है भारतीय क्रिकेट के अगले सितारों के लिए चमकने का।

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