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यूके में बेरोजगार और प्रशिक्षणहीन युवा 125 बिलियन पाउंड की भारी कीमत, रिपोर्ट ने ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ की चेतावनी दी

लंदन, यूनाइटेड किंगडम। एक ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यूनाइटेड किंगडम एक “खोई हुई पीढ़ी” के जोखिम में है, जहां 16 से 24 वर्ष के युवा जिनमें न तो रोजगार है, न शिक्षा या प्रशिक्षण, उनकी संख्या 2031 तक 12.5 लाख तक पहुंच सकती है। यह स्थिति अर्थव्यवस्था और समाज दोनों के लिए गंभीर खतरे की घंटी साबित हो सकती है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान मृत स्थिति के चलते युवा वर्ग का यह बड़ा हिस्सा न केवल अपने व्यक्तिगत विकास से वंचित रह जाएगा बल्कि पूरे राष्ट्र की उत्पादकता पर भी असर पड़ेगा। यदि समय रहते इस ओर ध्यान नहीं दिया गया तो बेरोजगारी और शिक्षा की कमी से जुड़े सामाजिक और आर्थिक मुद्दे और गहरे हो सकते हैं।

युवा लोगों का काम या प्रशिक्षण से बाहर रहना यूके पर लगभग £125 बिलियन का आर्थिक बोझ डाल रहा है। यह लागत केवल बेरोजगारी भत्ता या सामाजिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं, अपराध दर में वृद्धि, और समाज से अलगाव जैसे व्यापक मुद्दे इससे जुड़े हैं। एनालिस्टों ने इसे “परफेक्ट स्टॉर्म” करार दिया है जो तीन प्रमुख समस्याओं के एक साथ आने की वजह से बना है।

अध्ययन में बताया गया है कि युवाओं को रोजगार, शिक्षा और प्रशिक्षण के बेहतर अवसर प्रदान करना आवश्यक है ताकि इस संकट से बचा जा सके। सरकारी नीतियों में सुधार कर और निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी बढ़ाकर उस युवा वर्ग के लिए नई संभावनाएं पैदा करनी होंगी जो वर्तमान में वर्कफोर्स में नहीं है।

प्रशिक्षण और कौशल विकास प्रोग्रामों को बढ़ावा देकर युवा बेरोजगारों को रोजगार के योग्य बनाया जा सकता है, जिससे न केवल उनकी व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति मजबूत होगी बल्कि देश की जीडीपी में भी वृद्धि होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए पर्याप्त संसाधन आवंटित करना इस चुनौती का समाधान है।

सरकार, शिक्षा प्रणाली और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल और समन्वय के बिना इस “खोई हुई पीढ़ी” की समस्या को रोकना मुश्किल होगा। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि युवाओं के लिए काउंसलिंग और मेंटरशिप प्रोग्रामों को भी प्रभावी बनाया जाना चाहिए ताकि वे सही दिशा में कदम बढ़ा सकें।

युवा वर्ग में इस तरह की गिरावट न केवल आर्थिक नुकसान करती है बल्कि उनकी मानसिक और सामाजिक भलाई को भी नुकसान पहुंचाती है। इसके चलते नकारात्मक सामाजिक प्रभाव जैसे कि बढ़ता अपराध और सामाजिक अलगाव भी बढ़ सकता है, जो व्यापक रूप से समाज के लिए चिंता का विषय है।

समाप्त करते हुए, रिपोर्ट के लेखक ने सभी संबंधित पक्षों से आग्रह किया है कि वे इस “परफेक्ट स्टॉर्म” की चुनौतियों का सामना करने के लिए मिलकर रणनीतियां बनाएं और कार्यान्वयन करें ताकि भविष्य की पीढ़ी को एक सुरक्षित और सफल जीवन सुनिश्चित किया जा सके।

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