सार्थक सिद्धांत ने संसद की समिति के सामने CBSE OSM टेंडर अनियमितताओं की काट लगाई

रांची, झारखंड। १७ वर्षीय सार्थक सिद्धांत ने शिक्षा के क्षेत्र में अपनी गहराई से की गई जांच के परिणाम संसद की स्थायी समिति के सामने प्रस्तुत किए हैं। सार्थक ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की OSM टेंडर प्रक्रिया में पाई गई अनियमितताओं को उजागर किया है, जिससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग और मजबूती से उठी है।
सार्थक ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि टेंडर प्रक्रिया में कुछ नियमों का उल्लंघन हुआ है, जिससे गुणवत्ता और लागत को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने समिति को यह भी सुझाव दिया कि नीचे की स्तर की निगरानी बढ़ाई जाए और टेंडर प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जाए।
CBSE के अधिकारियों ने इस पर जवाब देते हुए कहा कि बोर्ड टेंडर प्रक्रिया के नियमों का पूरी तरह पालन करता है और इन अनियमितताओं की जांच चल रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि किसी भी कमी या गलती पाई जाती है तो उसे तुरंत सुधारा जाएगा और भविष्य में ऐसी कोई पुनरावृत्ति नहीं होगी।
स्थायी समिति के सदस्य भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी का इस तरह सक्रिय रहना शिक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। समिति ने CBSE से यह भी कहा कि वे सार्थक के सुझावों को गंभीरता से लें और तत्काल प्रभावी कदम उठाएं ताकि शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित न हो।
झारखंड के इस युवा प्रतिनिधि की यह पेशकश शिक्षा प्रणाली की पारदर्शिता में सुधार लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि इस तरह की जांच और रिपोर्टिंग से सरकारी संस्थानों में जवाबदेही और विश्वसनीयता बढ़ती है, जो अंततः छात्रों और नागरिकों के हित में है।
सारांशतः, सार्थक सिद्धांत द्वारा प्रस्तुत ये निष्कर्ष न केवल शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता दर्शाते हैं, बल्कि यह भी प्रमाणित करते हैं कि युवा भी सामाजिक मुद्दों पर जागरूक होकर बदलाओं का हिस्सा बन सकते हैं। CBSE का सकारात्मक रुख और सुधार का वादा इस दिशा में आशा जगाता है। भविष्य में ऐसी पहलें शिक्षा को और प्रभावी और पारदर्शी बनाने में सहायक होंगी।



