AIIMS ने एक महीने में गुणवत्ता चिंताओं के चलते दो सिरिंज बॅचेस को वापस लिया; जांच की मांग

नई दिल्ली, दिल्ली
संयुक्त स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा को लिखे पत्र में राज्यसभा सदस्य हरिस बीरान ने गंभीर चिंताएं जताई हैं। उन्होंने बताया कि पिछले महीने में एक ही महीने के भीतर दो बार डिस्पोजेबल 10 मिलीलीटर सिरिंज विथ नीडल की बॅचें वापस मंगवाई गई हैं। ये सिरिंज अलग-अलग निर्माताओं द्वारा सप्लाई की गई थीं। इन दोनों घटनाओं के बीच समय केवल तीन सप्ताह का रहा।
हरिस बीरान की इस शिकायत से स्वास्थ्य मंत्रालय और सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए चिंता के नए सवाल उठे हैं। AIIMS जैसी प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्था में भी इन सिरिंज की गुणवत्ता पर सवाल उठाना स्वास्थ्य सेवा के मानकों पर प्रत्यक्ष प्रहार है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिसिन और चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना न केवल रोगियों के स्वस्थ्य के लिए अनिवार्य है, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र की विश्वसनीयता को भी बनाए रखने के लिए जरूरी है। पिछले कुछ वर्षों में बढ़ती नकली और घटिया दवाओं की घटनाओं के बीच, इस तरह की रिकॉल खबरें स्वास्थ्य सुरक्षा का संकेतक माना जाता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय को इस मामले में तुरंत जांच करानी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। इसके साथ ही, दवाओं और मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति की गुणवत्ता पर भी विशेष निगरानी रखनी होगी। जो मरीज और डॉक्टर विश्वसनीय चिकित्सा संसाधनों की उम्मीद करते हैं, वे इस प्रकार की घटनाओं से निराश हो सकते हैं।
इस पत्र में हरिस बीरान ने मंत्रालय से अपील की है कि वे जांच के लिए एक समिति बनाएं और दोषियों को कानून के तहत सजा दिलाने की दिशा में कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि बेहतर निगरानी और कड़ी कार्रवाई से सरकार मेडिकल उपकरणों की गुणवत्ता सुनिश्चित कर सकती है और मरीजों की जान बचा सकती है।
AIIMS का यह कदम हमें यह याद दिलाता है कि स्वास्थ्य सुरक्षा में किसी प्रकार की छूट नहीं होनी चाहिए। चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि इलाज में बाधा न आए।
इससे पहले भी मेडिकल उपकरणों की गुणवत्ता को लेकर कई बार गंभीर चिंताएं सामने आ चुकी हैं, जो यह दर्शाता है कि इस क्षेत्र में सख्त नीतियों और कड़े नियमों की पूर्ण आवश्यकता है।
आखिरकार, स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता और मरीजों की सुरक्षा संयुक्त प्रयास से ही सुनिश्चित हो सकती है। सरकार, चिकित्सा संस्थान और सप्लायर्स को मिलकर इस दिशा में सक्रिय और जवाबदेह होना होगा।



