राष्ट्रीय

केरल के बिजली क्षेत्र पर बड़ा सवालिया निशान

तिरुवनंतपुरम, केरल

केरल में हाल ही में हुई बिजली संकट ने राज्य की ऊर्जा नीति और प्रबंधन की कमज़ोरियों को खुलेआम सामने ला दिया है। पिछले दशक में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद, केरल अपनी इस क्षमता का समुचित उपयोग नहीं कर पाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि दिन के समय उत्पादित अतिरिक्त बिजली को संग्रहित करने के लिए उपयुक्त प्रणालियों की कमी इस समस्या की बड़ी वजह है।

राज्य सरकार ने सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कई योजनाएं लागू की हैं, लेकिन अवसंरचना की कमी और निवेश की बाधाएं इसके पूर्ण लाभ उठाने में रोड़ा बनी हैं। दिन के समय जब सौर पैनल अधिकतम बिजली उत्पन्न करते हैं, तब इसे संग्रहित करने की प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावी नहीं है, जिसके कारण बिजली की आपूर्ति असंतुलित हो जाती है।

केंद्र सरकार की नीतियों और आर्थिक सहायता के बावजूद, केरल में ऊर्जा भंडारण की तकनीकें और उनके कार्यान्वयन में देरी हुई है। इसके अतिरिक्त, बिजली वितरण नेटवर्क में भी समय-समय पर तकनीकी और नियामकीय समस्याएं सामने आती रही हैं, जिससे आम जनता को बिजली कटौती का सामना करना पड़ता है।

विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि सौर ऊर्जा को आगे बढ़ाने के लिए ऊर्जा भंडारण के लिए बैटरी टेक्नोलॉजी में निवेश करना आवश्यक है। साथ ही, स्मार्ट ग्रिड तकनीकों को अपनाकर बिजली की आपूर्ति और मांग के बीच बेहतर तालमेल बनाना आवश्यक होगा।

इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर ऊर्जा की बचत और विकल्प ऊर्जा स्रोतों के प्रयोग को बढ़ावा देना भी राज्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरुरी है।

ऐसे में सरकार, उद्योग जगत और शोध संस्थानों को मिलकर रणनीति बनानी होगी जिससे केरल की बिजली क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों का समाधान हो सके और राज्य की ऊर्जा आवश्यकताएं स्थायी एवं पर्यावरण हितैषी तरीके से पूरी हो सकें।

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