फसल कटाई के समय वीडकिलर ग्लाइफोसेट के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की मांग

नई दिल्ली, भारत – हाल ही में स्वास्थ्य विशेषज्ञों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर वीडकिलर ग्लाइफोसेट के उपयोग पर कड़ी रोक लगाने की मांग उठाई है। उनका तर्क है कि इस रसायन के उपयोग से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों को गंभीर खतरा पहुंच सकता है।
ग्लाइफोसेट एक प्रचलित वीडकिलर है, जिसे जंगली घास और अन्य अवांछित पौधों को नियंत्रित करने के लिए खेतों में प्रयोग किया जाता है। पैदावार बढ़ाने के लिए किसान अक्सर इसे फसल कटाई के समय भी उपयोग करते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इससे बेरोकटोक किसान और उपभोक्ता दोनों की सेहत को नुकसान पहुंच सकता है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, ग्लाइफोसेट के लगातार संपर्क में आने से त्वचा संबंधी समस्याएँ, श्वसन रोग और यहां तक कि कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इसे संभवतः कैंसरजन्य पदार्थ घोषित किया है, हालांकि कई देशों में इस पर विभिन्न स्तरों पर नियम बनाए गए हैं।
पर्यावरणविदों का यह भी मानना है कि ग्लाइफोसेट का दुरुपयोग भूमि की उपजाऊ शक्ति को कम करता है और जलीय जीवन को भी नुकसान पहुंचाता है क्योंकि इसकी वजह से पानी का प्रदूषण होता है। इसके कारण कृषि क्षेत्र में जैव विविधता का नुकसान भी देखा गया है।
किसान संघों और कार्यकर्ता समूहों ने सरकार से अपील की है कि वे तुरंत इस रसायन के उपयोग पर कट्टरपंथी प्रतिबंध लगाएं, खासकर फसल कटाई के समय। उनका कहना है कि इसके लिए स्वच्छ और सुरक्षित वैकल्पिक उपायों को बढ़ावा देना आवश्यक है ताकि कृषि क्षेत्र में स्थायी विकास सुनिश्चित किया जा सके।
सरकारी अधिकारी इस मामले में जांच कर रहे हैं और आम जनता की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने की प्रतिज्ञा कर चुके हैं। वहीं, विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसानों को रासायनिक उर्वरकों और वीडकिलरों के सुरक्षित इस्तेमाल की जानकारी प्रभावी रूप से दी जाए।
इस विवाद के बीच उपभोक्ता और कृषि विशेषज्ञ दोनों ही इस बात पर सहमत हैं कि पर्यावरण और स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए ग्लाइफोसेट का उपयोग नियंत्रित होना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ जीवन शैली सुनिश्चित की जा सके।



