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एलोन मस्क के नेतृत्व में सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लगी पाबंदी आम हो गई: इल्तिजा मुफ्ती

श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर – इल्तिजा मुफ्ती ने हाल ही में सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लगाई गई पाबंदियों की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि ये पाबंदियां उनके लिए बड़े मुद्दों को उठाने और आम जनता तक अपनी आवाज़ पहुंचाने में बाधा बन गई हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बंद करना न सिर्फ लोकतांत्रिक अधिकारों के विपरीत है बल्कि जनहित के मुद्दों को दूर रखने का जरिया भी बनता जा रहा है।

इल्तिजा मुफ्ती, जो एक सक्रिय सामाजिक एवं राजनीतिक नेतृत्वकर्ता हैं, ने बताया कि सोशल मीडिया पर उनके अकाउंट्स पर लगी पाबंदी ने उन्हें आम जनता तक अपनी समस्याएं तथा प्रशासनिक गलतीयां पहुँचाने में बेहद मुश्किलें पैदा कर दी हैं। उन्होंने कहा, “यह स्थिति मेरी आवाज़ को दबाने जैसा है क्योंकि सोशल मीडिया मैंने लोकहित के मुद्दे उठाने और नागरिकों से सीधे संवाद स्थापित करने के लिए इस्तेमाल किया।”

यह पाबंदी विशेष रूप से तब लगी जब इल्तिजा मुफ्ती ने सरकार की नीतियों और कथित misgovernance (खराब प्रशासन) पर सवाल उठाए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में विचारों की स्वतंत्रता सर्वोपरि होनी चाहिए और सोशल मीडिया इसके लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया अकाउंट्स को बिना उचित कारणों के बंद करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पाबंदी है, जो कि संविधान के मूल अधिकारों का उल्लंघन है। साथ ही, इससे आम लोगों के लिए क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण मुद्दे उठाने की जगह सीमित हो जाती है।

सोशल मीडिया की व्यापक पहुंच के कारण यह आज के समय में जनता और सरकार के बीच संवाद का सबसे प्रभावशाली माध्यम बन चुका है। इसलिए, इस माध्यम को बंद करने की प्रथा से लोकतांत्रिक पहलुओं को गंभीर नुकसान पहुंचता है। इल्तिजा मुफ्ती सहित कई वकीलों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस प्रकार की कार्रवाइयों के विरुद्ध आवाज उठाई है और इस मुद्दे पर न्यायालयीन कार्रवाई की मांग भी की गई है।

अंत में, इल्तिजा मुफ्ती ने जनता से आह्वान किया है कि वे अपनी आवाज़ को दबने न दें और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखें। उन्होंने कहा, “हमारी लड़ाई स्वच्छ प्रशासन और जनहित के लिए है, और सोशल मीडिया तब तक बंद रह सकता है जब तक हम अपनी आवाज़ उठाना बंद न कर दें।”

यह मुद्दा सोशल मीडिया की भूमिका और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर एक व्यापक चर्चा को जन्म दे रहा है, जिस पर भविष्य में सरकार समेत सभी संबंधित पक्षों को ध्यान देना अनिवार्य होगा।

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