क्वाड ‘अत्यंत महत्वपूर्ण’ बना रहेगा, जापानी विदेश मंत्री ने इंडो-पैसिफिक में समूह की अहमियत पर उठे सवालों को खारिज किया

नई दिल्ली, भारत – क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की आगामी बैठक को लेकर जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ की हैं। उन्होंने कहा कि क्वाड समूह अब भी ‘‘काफी महत्वपूर्ण’’ है और इस क्षेत्र में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। मोतेगी ने विशेष रूप से भारत में बेहतर अवसंरचना, बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा, और महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों में सहयोग को बैठक के शीर्ष एजेंडा में बताया।
मोतेगी ने उल्लेख किया कि विश्व में चल रही आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और वैश्विक अर्थव्यवस्था की चुनौतियों को देखते हुए, क्वाड के देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और तकनीकी सहयोग की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग से क्वाड देशों को नई तकनीकों के विकास और उत्पादन में सहायता मिलेगी, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।
भारत में बौद्धिक संपदा अधिकारों की बेहतर सुरक्षा को लेकर भी मोतेगी ने जबरदस्त जोर दिया। उनका मानना है कि यह विषय न केवल आर्थिक संवाद बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि नवाचार और उद्यमिता के लिए भी एक सुरक्षित माहौल तैयार करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘भारत में इन क्षेत्रों की मजबूती से जापान सहित अन्य क्वाड देशों के लिए भी दीर्घकालिक निवेश और तकनीकी सहयोग की संभावनाएं बढ़ेंगी।’’
क्वाड, जिसमें भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका शामिल हैं, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक और आर्थिक संतुलन बनाए रखने में एक प्रमुख भूमिका निभाता रहा है। पिछले कुछ वर्षों में इस समूह की गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है, खासतौर पर समुद्री सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, और महामारी जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में।
मोतेगी ने कहा कि आगामी विदेश मंत्रियों की बैठक में क्वाड का एजेंडा व्यापक होगा और इसमें वैज्ञानिक अनुसंधान, डिजिटल अवसंरचना, जलवायु परिवर्तन से मुकाबला, और क्षेत्रीय शांति के मुद्दे शामिल होंगे। उन्होंने प्रेस को बताया कि ‘‘यह बैठक क्वाड देशों के बीच मजबूत साझेदारी के निर्माण में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।’’
विश्लेषकों का मानना है कि क्वाड का फोकस केवल सामरिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह समूह सामूहिक रूप से आर्थिक प्रतिस्पर्धा और तकनीकी विकास के क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगा। भारत में निवेश को बढ़ावा देने के लिए बेहतर अवसंरचना और सुरक्षा नीतियों का होना आवश्यक है, ताकि व्यापार और इनोवेशन के अवसर बढ़ें।
इस बैठक को लेकर कुल मिलाकर यह उम्मीद की जा रही है कि क्वाड सदस्य देश तीसरे देशों की आक्रामक नीतियों के मुकाबले अपनी साझा प्रतिबद्धताओं को मजबूत करेंगे, और अपनी-अपनी राष्ट्रीय हितों को संतुलित करते हुए क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि बनाए रखेंगे।



