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सऊदी अरब की भारी खर्च करने की लहर का अंत

रियाद, सऊदी अरब – सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने जो ‘विजन 2030’ परियोजना शुरू की थी, उसे शुरुआत में विज्ञान-कथा जैसा माना जा रहा था। लेकिन अब यह परियोजना धरातल पर आ चुकी है और इसके परिणाम भी सामने आने लगे हैं।

विजन 2030 का उद्देश्य था सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से मुक्त करना और उसे विविधतापूर्ण बनाना। इसमें बड़ी-बड़ी निवेश योजनाएं, पर्यटन को बढ़ावा देना और घरेलू रोजगार के अवसरों का सृजन शामिल था। इसके लिए भारी मात्रा में धनराशि खर्च की गई, जिसमें बुनियादी ढांचे का विकास, नई स्मार्ट सिटी बनाने जैसे नेओम प्रोजेक्ट और सांस्कृतिक गतिविधियों का विस्तार शामिल था।

शुरुआती वर्षों में, इस योजना ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और वैश्विक मीडिया का ध्यान आकर्षित किया, लेकिन कोविड-19 महामारी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा। खर्च की तेजी पर लगाम लगाना पड़ा और कई परियोजनाओं को पुनर्मूल्यांकन करना पड़ा।

विशेषज्ञों का कहना है कि अब सऊदी अरब की सरकार खर्च की रणनीति को अधिक सतर्क और प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रही है। वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए अनावश्यक खर्च कम किए जा रहे हैं और प्राथमिकताएं बदल रही हैं। विश्लेषकों के अनुसार, MBS की वीज़न 2030 योजना में चिरकालिक प्रगति के लिए यह एक आवश्यक कदम था।

इस बदलाव के बावजूद, सऊदी अरब ने डिजिटल टेक्नोलॉजी, हरित ऊर्जा और पर्यटन क्षेत्र में निवेश जारी रखा है, ताकि दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित किया जा सके। सरकार ने आर्थिक विविधीकरण से जुड़ी कई नई पहलें भी लागू की हैं, जो अब धीरे-धीरे फल देने लगी हैं।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मानते हैं कि भले ही ‘खर्च करने की spree’ समाप्त हो गई हो, लेकिन यह बदलाव सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। इस दौर में सबक सीखकर ही मिद-टर्म में स्थिर और सतत विकास संभव है। सऊदी अरब की यह परिपक्वता उसकी दीर्घकालिक महत्वाकांक्षाओं के लिए जरूरी है।

इस प्रकार, MBS की योजनाएं यथार्थ में बदलती गई हैं, और अब सऊदी अरब एक अधिक सतर्क और द्रष्टव्य आर्थिक नीति के तहत अपने विजन को सच करने की राह पर है।

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