गोपनीयता, शौचालयों की कमी और सामाजिक कलंक के चलते ओडिशा की लड़कियां माहवारी के दौरान स्कूल जाना छोड़ती हैं

भुवनेश्वर, ओडिशा – हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण में यह खुलासा हुआ है कि ओडिशा के 94% स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय उपलब्ध हैं, लेकिन मासिक धर्म से जुड़े बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं की कमी और पानी- साबुन की अनुपलब्धता लड़कियों के लिए बड़ी बाधा बनी हुई है। इस वजह से कई लड़कियां माहवारी के दौरान स्कूल नहीं जा पाती हैं।
शिक्षा विभाग तथा स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि स्कूलों में मासिक धर्म संबंधी सही सुविधाओं का अभाव, लड़कियों के शैक्षिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। जब लड़कियां अपने मासिक धर्म के दौरान उचित सफाई का इंतजाम नहीं पातीं, तो वे स्वयं असहज महसूस करती हैं और कई बार सामाजिक कलंक के चलते स्कूल छोड़ने का निर्णय लेती हैं।
सर्वेक्षण में पाया गया कि虽然 अधिकांश स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय मौजूद हैं, परन्तु उनमें पानी और साबुन की नियमित उपलब्धता नहीं है, जिससे साफ-सफाई बनाए रखना संभव नहीं हो पाता। इसके परिणामस्वरूप, लड़कियां मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता के अभाव में बिमारियों के जोखिम से भी जूझती हैं, जिससे उनकी पढ़ाई बाधित होती है।
विशेषज्ञों ने कहा कि सामाजिक और सांस्कृतिक कलंक पर भी ध्यान देना जरूरी है जो मासिक धर्म को एक निजी विषय बनाने के बजाय एक सामान्य स्वास्थ्य विषय के रूप में देखने में बाधा डालता है। महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी जागरूकता बढ़ाकर और स्कूलों में बेहतर सुविधाएं प्रदान करके इस समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
सरकारी और गैर-सरकारी संस्थान मिलकर इस दिशा में कदम उठा रहे हैं, लेकिन अभी भी मार्ग लंबा है। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि लड़कियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित माहवारी सपोर्ट सिस्टम तैयार करना बेहद आवश्यक है ताकि वे शैक्षिक जीवन में बिना किसी बाधा के सफलता प्राप्त कर सकें।



