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संकट में बादशाह: अल्फेंसो आमों की दशा

मुंबई, महाराष्ट्र – भारत के प्रसिद्ध और विश्व विख्यात अल्फेंसो आमों, जिन्हें आमों का राजा कहा जाता है, को वर्तमान में अनेक संकटों का सामना करना पड़ रहा है। यह संकट न केवल किसानों और व्यापारियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए भी चिंता का कारण है।

अल्फेंसो आमों की खासियत उनकी विशिष्ट मिठास और सुगंध है, जो भारत के महाराष्ट्र राज्य के रत्नागिरी, मनोर और सिंधुदुर्ग जिलों में उगाई जाती है। इन आमों की मांग हर साल देश-विदेश में बढ़ती जा रही है, खासकर विदेशों में भारतीय व्यंजनों की लोकप्रियता बढ़ने के कारण। हालांकि, इस बार उत्पादन में गिरावट, मौसम की अनियमितताओं और कोविड-19 महामारी से प्रभावित रसद श्रृंखला ने इसकी सप्लाई पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।

किसान इस बार लगभग 30-40% कम उत्पादन की रिपोर्ट कर रहे हैं, जिसका मुख्य कारण मौसम में हुई अनिश्चितता और पौधों को लगी बीमारियां हैं। साथ ही निर्यात के लिए आवश्यक दस्तावेजीकरण और बंदोबस्तों में हुई रुकावटों ने आम निर्यात में देरी पैदा की है। इन समस्याओं के चलते, स्थानीय बाजार में अल्फेंसो आमों के दाम भी अस्थिर हो गए हैं।

अन्न और कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि किसानों की सहायता के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम चल रहा है। फल उत्पादन को बढ़ावा देने और निर्यात प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए डिजिटल मंचों का उपयोग बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, किसानों को बीमारियों पर नियंत्रण के लिए प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर जल्द ही इस संकट का समाधान नहीं निकला, तो अल्फेंसो आम की आपूर्ति में और कमी आ सकती है, जो न केवल आर्थिक नुकसान का कारण बनेगा, बल्कि भारतीय आम उद्योग की साख को भी दांव पर लगा सकता है। इस समय उपभोक्ताओं से भी एक समझदारी भरा व्यवहार अपेक्षित है ताकि बाजार में कीमतों में उछाल से बचा जा सके।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अल्फेंसो आमों का यह संकट मौसम से लेकर आर्थिक और प्रशासनिक अनेक पहलुओं से जुड़ा हुआ है। इसे सुलझाने के लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर कार्य करना होगा ताकि यह आम, देश-विदेश में अपनी खास पहचान और मिठास बनाए रख सके।

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