स्वदेशी तकनीक का कमाल: DRDO ने सफलतापूर्वक परीक्षण किया ‘TARA’ दुश्मनों पर सटीक वार करेगा, भारत को मिली नई सैन्य शक्ति

नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और भारतीय वायु सेना ने 7 मई 2026 को ओडिशा तट पर सामरिक उन्नत रेंज संवर्धन (टीएआरए) हथियार का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया। इस सफलता को भारत का स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। टीएआरए भारत की पहली स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली है, जिसे मॉड्यूलर रेंज एक्सटेंशन किट के रूप में विकसित किया गया है। यह प्रणाली अनिर्देशित वारहेड को सटीक निर्देशित हथियार में बदलने की क्षमता रखती है, जिससे दुश्मन के ज़मीनी लक्ष्यों पर अधिक सटीकता के साथ हमला किया जा सकता है।
इस अत्याधुनिक प्रणाली को इमारात अनुसंधान केंद्र ने डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं के सहयोग से डिज़ाइन और विकसित किया है। टीएआरए का उद्देश्य कम लागत वाले हथियारों की मारक क्षमता और सटीकता को बढ़ाना है। डीआरडीओ के अनुसार, यह देश का पहला ग्लाइड हथियार है जिसमें अत्याधुनिक और कम लागत वाली प्रणालियों का उपयोग किया गया है। इसके निर्माण में विकास सह उत्पादन साझेदारों (डीसीपीपी) और भारतीय उद्योगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस प्रणाली का उत्पादन कार्य भी शुरू कर दिया गया है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना और उद्योग जगत को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करेगी।
वहीं, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने भी इस मिशन से जुड़ी सभी टीमों को सफल परीक्षण के लिए शुभकामनाएं दी।



