Once Trump’s Co-Pilot Against Iran, Netanyahu Is Now a Mere Passengerएक समय ईरान के खिलाफ ट्रम्प के सह-पायलट थे नेतन्याहू, अब केवल एक यात्री बने हुए हैं

Jerusalem, Israel
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए हाल के दिनों में एक बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत मिला है, जब वह ईरान के खिलाफ अमेरिका के सहयोगी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेता से अब शांति वार्ताओं से लगभग पूरी तरह से बाहर रह गए हैं। यह उनके लिए एक शर्मनाक वापसी के साथ-साथ देश के लिए भी कई खतरों को जन्म दे सकता है।
नेक प्रतीत होता है कि अब तक ईरान के साथ तनाव के बीच फื้นायी गई साझेदारी में इस्राइल को एक सक्रिय भागीदार माना जाता था, लेकिन वर्तमान शांति वार्ताओं में उसकी उपेक्षा ने नेतन्याहू को केवल एक प्रतीक्षारत यात्री के रूप में बदल दिया है। इस प्रकरण ने राजनीतिक विश्लेषकों में असहमति और चिंता को जन्म दिया है, जहां यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह इस्राइल की क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित करेगा या नहीं।
विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू की यह पर्खाई एक तरह से अंतरराष्ट्रीय दबाव और बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के कारण आई है, जहां शांति वार्ताओं की अगुवाई दूसरे खिलाड़ियों के हाथों में चली गई है। इसके अलावा, इस पृष्ठभूमि में ईरान के साथ बढ़ती अस्थिरता और परमाणु कार्यक्रम को लेकर वैश्विक चिंता इस्राइल की भूमिका को संकुचित कर रही है।
इस्राइल के लिए यह स्थिति एक महत्वपूर्ण मोड़ है, क्योंकि क्षेत्रीय सहयोगी देशों के साथ मजबूत रिश्ते पहले से ही आवश्यक हैं, खासकर जब कि खतरे बढ़ रहे हों। नेतन्याहू और उनकी सरकार को इस पर तेजी से प्रतिक्रिया देना आवश्यक है, नहीं तो उनकी विदेशी नीति कमजोर पड़ने और देश की सुरक्षा जोखिम में आने का खतरा है।
यह बदलाव केवल नेतन्याहू का व्यक्तिगत झटका नहीं, बल्कि इज़राइल की व्यापक रणनीति और विदेश नीति का पुनर्मूल्यांकन करने का समय बता रहा है। शांति वार्ता से बाहर रहना इज़राइल को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी आवाज कमजोर कर सकता है और क्षेत्रीय तनाव को बढ़ा सकता है।
राजनीतिक जानकार इस बात पर भी ध्यान दे रहे हैं कि आगामी महीनों में इस्राइल किन रणनीतियों का सहारा लेगा और क्या नेतन्याहू अपनी स्थिति को पुनः मजबूत करने में सफल होंगे। क्षेत्रीय स्थिरता, सामरिक साझेदारी और आतंकवाद से मुकाबले के लिए इस्राइल की भूमिका पर यह बड़ा असर डालेगा।
अतः इस्राइल के लिए यह समय गंभीर चुनौती और अवसर दोनों लेकर आया है, जहां राजनीति, कूटनीति और सुरक्षा के नए समीकरणों से निपटना होगा। नेतन्याहू के लिए अब केवल सह-पायलट से यात्री बनना नहीं, बल्कि फिर से एक सशक्त कप्तान बनने की जरूरत है।



